Namaj ke farz ,नमाज़ के फर्ज

بسم الله الرحمن الرحيم

नमाज के फर्ज 

Namaj me faraiz, नमाज़ के फराइज
Namaj me faraiz, नमाज़ के फराइज

नमाज पढ़ना अल्लाह का हुक्म है हमारे नबी मुहम्मद सल्लालाहू अलईही व सल्लाम की सुन्नत है और हमारी जरूरत है नमाज़ मोमिन की मेराज है नमाज़ जन्नत में जाने का रास्ता है नमाज़ दीन का सतून  (खंबा बीच का sport )   जैसे इंसान का सतून इंसान के रीड की हड्डी होती है

नमाज के फर्ज

नमाज के अंदर तेरह फर्ज होते हैं जिसमें 6 फर्ज नमाज के अंदर होते है और 7 फर्ज नमाज के बाहर होते हैं नमाज के बाहर के फर्ज के बिना हम नमाज के लिए तैयार नहीं हो सकते नमाज शुरू करने से पहले हमें नमाज के बाहर के फर्ज पूरा करना जरूरी है और नमाज के 7 बाहर के फर्ज ये है

1.बदन का पाक होना।

  नमाज के फर्ज में सबसे पहला फर्ज है बदन पाक होना चाहिए बदन को पाक करने के लिए हमें गुसल करना पड़ेगा जब हम गुसाल कर लेंगे तो हमारा बदन पाक हो जाएगा

2. जमीन का पाक होना

नमाज के फर्ज का दूसरा फर्ज है जमीन का पाक होना जिस जगह नमाज हम पढ़ते हैं वो जगह पूरी तरह से साफ सुथरी होनी चाहिए यानी नमाज पढ़ने की जगह पर कोई गंदगी नहीं होनी चाहिए

3.स्तर का ढकना

सतर का ढकना हर मर्द और औरत पर बिना नमाज के भी जरूरी है ढकना मर्द का स्तर नाभि से लेकर घुटनों के नीचे तक होता है इतनी जगह नमाज के अंदर ढकना जरूरी है नहीं तो नमाज नहीं होगी और औरत का स्तर सर से लेकर पांव तक पूरा मुकम्मल जिस्म ढका होना चाहिए और यह सिर्फ नमाज में ही नहीं नमाज के बाहर भी ऐसे ही रहना फर्ज है

4.कपड़ों का पाक होना

नमाज के फर्ज में कपड़ों का साफ होना भी बहुत जरूरी है कपड़ा चाहे पुराना हो जरूरी नहीं कि नया कपड़ा पहनकर नमाज पढ़ने जाएं लेकिन पकड़ा पाक साफ होना जरूरी है कपड़ा धुला हुआ होना चाहिए और कपड़े को नमाज पढ़ने से पहले अच्छी तरह से देख ले कहीं कोई गंदगी ना लगी हो

5.किब्ला रुख करना

नमाज के फर्ज में किब्ला रुख का होना बहुत जरूरी है इस्लाम के अंदर मक्का मुकर्रमा काबा शरीफ है इस वजह से उस काबा की तरफ मुंह करके खड़ा होना जरूरी है हमारा शरीर का मुंह हाथ पैर सब काबा की तरफ होने चाहिए जब हमारी नमाज होगी।

6.नमाज का वक़्त होना

नमाज के फर्ज में नमाज का वक्त होना बहुत जरूरी है बिना वक्त के पढ़ी गई नमाज नहीं होती है अगर हम बिना वक्त हुए नमाज के नमाज पढ़ेंगे तो हमारी नमाज नहीं होगी दिन और रात के वक्त ओं में कुछ वक्त ऐसे हैं जो मकरू वक्त है उस वक्त नमाज नहीं पढ़नी चाहिए

7.नमाज की नियत करना

नमाज़ की नियत करना कि मैं नमाज के फर्ज पढ़ रहा हूं और कितने फर्ज पढ़ रहा हूं या सुन्नत पढ़ रहा हूं या न फल पढ़ रहा हूं यह हमारी नियत होती है हमें नमाज के अंदर नमाज़ की नियत करना जरूरी है बिना नियत किए नमाज नहीं होगी


नमाज के अंदर के 6 फर्ज


  1. तकबीर ए तहरीमा कहना
तकबीर ए तहरीमा कहना यानी अल्लाह हू अकबर कहकर नमाज शुरू करना जब आजान होती है तब भी तकदीर पढ़ी जाती है वही तकदीर नमाज के बाहर के पूरे फर्ज करने के बाद नमाज के लिए खड़े होते हैं सबसे पहला फर्ज नमाज के अंदर का यही है अगर हम अल्लाह हू अकबर केहकर नियत नहीं बांधेग तो हमारे नमाज मुकम्मल नहीं होगी

 2.कयाम करना 

नमाज के अंदर नमाज के फर्ज में यह भी है के क्याम करना यानी सीधा खड़ा होना नमाज बिना किसी वजह के बैठ कर या सो करना पढ़ अगर कोई मजबूरी हो तो अलग बात है नहीं तो खड़े होकर नमाज पढ़ना फर्ज है

3. किरात का पढ़ना

किरात का पढ़ना यानी कुरान शरीफ  की तीन छोटी  आयतें पढ़ना या फिर एक बड़ी आयत पढ़ना

4. रुकू करना

रुकू करना यानी खड़ा होने के बाद दोनों हाथ अपने घुटनों पर रखकर झुकना

 5.ऐक रकात में दो सजदे करना

नमाज के फर्ज में यह भी बहुत जरूरी है कि हर रकात में 2 सजदे करना अगर रकात के अंदर एक सजदा करके सीधा खड़े हो गए तो हमारा एक फर्ज छूट जाएगा और एक फर्ज टूट गया तो पूरी नमाज बेकार हो जाएगी

6. आत्तहियात में बैठना
और नमाज के फर्ज में अत्ताहियात कितनी देर में पढ़े जाए इतनी देर बैठना
मैने आपको सिर्फ नमाज के फर्ज बताए है जिनके पूरा करने से हमारी नमाज हो जाएगी अगर पोस्ट अच्छी लगे तो शेयर जरुर करे

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